वेदोंमें देवताओं के राजा इन्द्रकी
महिमा का विशेष रूप से वर्णन हुआ है | एक बार की बात है जब नीतिधार्मों के उच्छेदक
वृत्रासुर का वध करके देवराज इंद्र इन्द्रलोक में लौटे तो उस समय सभी देवताओं और
महर्षियों ने उन्हें बहुत सम्मान किया | उसी समय उनके सारथी मातलिने हाथ जोड़कर
उनसे पूछा – भगवन् ! जो सबके द्वारा वन्दित होते हैं, उन समस्त देवताओं में आप अग्रगण्य हैं, परन्तु आप भी इस जगत् में जिन महापुरुषों को , नीतिधर्मतत्वज्ञों को
प्रणाम करते हैं वे कौन हैं , बतालानेकी कृपा करें |
इसपर देवराज इन्द्र बोले –
मातले ! धर्म, अर्थ और कामका चिंतन करते हुए भी जिनकी बुद्धि धर्म में नहीं लगती,
मैं प्रतिदिन उन्हीं को नमस्कार करता हूँ –
धर्मं चार्थं च कामं येषां
चिन्तयतां मतिः |
नाधर्मे वर्तते
नित्यं तान् नमस्यामि मातले ||
हे मातले ! जो अपने को प्राप्त हुए भोगोंमें ही संतुष्ट है,
दूसरों से अधिक की इच्छा नहीं रखते हैं, जो सुंदर वाणी बोलते हैं और बोलने में
कुशल हैं, जिनमें अहङ्कार तथा कामना का सर्वथा अभाव है तथा जो सबसे पाने योग्य हैं उन्हें मैं नमस्कार
करता हूँ –
स्वेषु भोगेषु सन्तुष्टाः सुवाचो वचनक्षमाः |
अमानकामाच्श्राघ्र्यार्हास्तान नमस्यामि मातले ||
तीर्थों की महिमा – देवराज इन्द्र ने गङ्गादि तीर्थों में श्रद्धाभक्तिपूर्वक स्नान – अवगाहन करने की
प्रेरणा प्रदान की है, इतना ही नहीं वे कहते हैं कि तीर्थों का मन – ही – मन स्मरण
करके सामान्य जल में भी उन तीर्थों की भावना करने से उन तीर्थों में जाकर स्नान
करने का फल प्राप्त हो जाता है | मनुष्य को चाहिये कि वह कुरुक्षेत्र, गया, गङ्गा, प्रभास और पुष्कर क्षेत्र का
मन – ही – मन चिंतन करके जल में स्नान करें, ऐसा करने से वह पाप से उसी प्रकार
मुक्त हो जाता है जैसे चंद्रमा राहु के ग्रहण से –
कुरुक्षेत्रं गयां गङ्गां
प्रभासं पुष्कराणि च
एतानि मनसा
ध्यात्वा अवगाहेत् ततो जलम |
तथा मुच्यन्ति पापेन
राहुणा चन्द्रमा यथा ||
सबसे बड़ा तीर्थ गोसेवा - देवराज इन्द्र बताते हैं कि
गौओंमें सभी तीर्थ प्रतिष्ठित हैं, जो मनुष्य गाय की पीठ छूता है और उसकी पूँछको
नमस्कार करता है वह मानो तीर्थो में तीन दीनों तक उपवासपूर्वक रहकर स्नान कर लेता
है –
त्र्यहं स्नातः
स भवति निराहारश्च वर्तते |
स्पृशते यो
गवां पृष्ठं बालधिं च नमस्यति ||
इस प्रकार संक्षेप में देवराजइन्द्र
ने अप्रत्यक्ष – रूप से जो नीति – धर्म का उपदेश दिया वह बड़ा ही कल्याणकारी है |

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